Tuesday, 26 July 2016

पहचान मुझे मैं भारत हूँ।।

पहचान मुझे मैं भारत हूँ।।
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क्रोधित हूँ, आवेशित हूँ, 
असहिष्णु तक घोषित हूँ।
अब भी क्या मैं चुप रहूँ, 
जब चहुँ दिशा से शोषित हूँ।।
पहचान मुझे मैं भारत हूँ।
>>...>>
हर जुल्म के आगे डटा रहा था,
तुफानो में मैं खड़ा रहा था।
तब भी घुटने टेके ना थे,
जिद्द पर अपनी अड़ा रहा था।।
वो दौर गया,
मैं आज़ाद हुआ,
सोचा अब मेरे भी दिन बदलेंगे।
ना जान सका,
पहचान सका,
कि शत्रु तो भीतर ज्यादा पनपेंगे।।
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आज तो मैं अपनों से ही आहत हूँ।
पहचान मुझे मैं भारत हूँ।।
>>
छला जा रहा अपनों से,
झूठ मुठ के सपनो से।
दुष्ट निवाले छीन रहे,
दीन, दुखी और बच्चों से।।
जो भूल गए वो याद करो,
मैं ही शिव का तांडव हूँ।
रघुकुल का राम हूँ मैं,
अर्जुनरूपि पांडव हूँ।।
अधर्म का नाशी मैं महाभारत हूँ।
पहचान मुझे मैं भारत हूँ।
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इस धरा की खोई विरासत हूँ।
पहचान मुझे मैं भारत हूँ।
@n@nt -feel free to share ur views

‎अपनी_हस्ती_लूटा_रहे_हम‬.

‪#‎अपनी_हस्ती_लूटा_रहे_हम‬.
ना जाने चले कहाँ से थे, किधर को जा रहे हम.
आज अपने ही हाथों अपनी हस्ती लूटा रहे हम.
जो मिली थी हमको इस भूमि से विरासत,
छोड़ उसे पराई सर पर बिठा रहे हम.
आज अपने ही हाथों अपनी हस्ती लूटा रहे हम.
आन इस धरा की कहीं खाक हो ना जाए,
शोलो से रहगुजर है कहीं राख हो ना जाए,
आँख मूंद कर दौलत अपनी लूटा रहे हम.
आज अपने ही हाथों अपनी हस्ती लूटा रहे हम.
@n@nt

जमानत‬ मैं दूंगा।।

‪#‎पाकिस्तान‬ को जिंदाबाद कहो।
‪#‎जमानत‬ मैं दूंगा।।
‪#‎हिंदुस्तान‬ को मुर्दाबाद कहो।
#जमानत मैं दूंगा।।
‪#‎शहीदों‬ का अपमान करो।
#जमानत मैं दूंगा।।
‪#‎आतंक‬ का गुणगान करो।
#जमानत मैं दूंगा।।
‪#‎धर्म‬ का चाहे अपमान करो।
#जमानत मैं दूंगा।।
‪#‎अधर्म‬ का सम्मान करो।
#जमानत मैं दूंगा।।
‪#‎भारत‬ माँ को डायन बोलो।
#जमानत मैं दूंगा।।
‪#‎राम‬ को चाहे रावण बोलो।
#जमानत मैं दूंगा।।
।।।
मैं ‪#‎अंग्रेजी‬ कानून हूँ,
हर ‪#‎इल्जाम‬ से तुम्हे बचा लूंगा।
बस ‪#‎देशभक्ति‬ की बात न करना,
वरना घर से तुम्हे उठा लूंगा।।
‪#‎Share_only_if_u_support‬...

युग चला किस राह पर।

कोई आज मुझे बस बतलादे बस, 
ये युग चला किस राह पर।
में अकेला क्या करूं, 
कुछ कर सकुँ ना चाह कर।।
।।
हे अबंर के वासी, आ देख,
मंजर हैं बरबादी के।
यही अगर जो पृलय है,
तो मेरा भी इसांफ कर।।
।।
मैं सच में हुँ परेशान सोचकर,
ये युग चला किस राह पर।
में अकेला क्या करूं,
कुछ कर सकुँ ना चाह कर।।
।।
@n@nt

Friday, 17 June 2016

माइ चोइज।

माइ चोइज
आजादी के नाम पर अस्लीलता फैलाने की खुली छूट मागंने वाले तब क्या कहेंगे जब कोइ इसी आजादी की दुहाइ देकर बिच सड़क पर नगां होने की जिद्द करने लग जाऐ।
तब आप अपनी बहन बेटीयों को यह अजादी दिखाने वहाँ ले जाओगे या उस आजादी को दिखाने, उन्हे अपने घर बुलाओगे?

चल चल कलम, तु उठा कदम,

चल चल कलम, तु उठा कदम,
और लिखदे मन की बात को।
लिख, जो मन में है गुब्बार भरा,
लिख बेकाबु जज्बात को।।
बोली वो,
क्या लिखुं, गीत, गजल या शायरी,
या लिख दूँ एक कहानी।
बादल लिख दूँ, पर्वत लिख दूँ,
या नभ से गिरता पानी।।
,,,,
मैंने कहा, गीत, गजल और पर्वत छोड़,
रहने दे बरसात को।
लिखना है तो लिख, मेरे बेकाबु जज्बात को।।
,,,
वो बोली, देख भाई @अनंत, बैकती तो कर मत और मोबाइल में खुद से लिखले।।
@n@nt

ये जो नेता है, ये तो होता ही है खोटा।

ना सुबह को भुला, ना साँझ को लौटा,
ये जो नेता है, ये तो होता ही है खोटा।।
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गिरगिट भी शरमाता है,
इसकी रगंकला को देखकर।
सापों ने ड़सना छाड़ दिया,
इसका डसना देखकर।।
कब किधर को मारे पलटीे,
ये कोइ भी ना जान सका।
कभी कभी तो अपनी कथनी,
खुद ये भी ना मान सका।।
सिधी भाषा में कहें तो, ये है बिन पैन्दे का लोटा।
ये जो नेता है, ये तो होता ही है खोटा।।

एक चिगांरी नजर तो आऐ,
और थोड़ा मतलब भी दिख जाए।
ले चमचों की फौज वहाँ,
ये दौड़ा दौड़ा जाए।।
तेल छिड़क कर मिट्टी का,
खुद ही आग लगाता है।
लेकिन कहता ये है कि,
वो तो आग बुझाता है।।
फूल दिखाकर दूर से, ये काटें हरदम बोता।
ये जो नेता है, ये तो होता ही है खोटा।।
@n@nt