Saturday, 30 May 2015

शैतान क्या हैं??

सन् 1902 में एक professor ने अपने छात्र से पुछा....
क्या वह भगवान था जिसने इस संसार की हर वस्तु को बनाया...?
छात्र का जवाब : हां।
उन्होंने फिर पुछा:-
शैतान क्या हैं...?
क्या भगवान ने इसे भी बनाया ?
छात्र चुप हो गया.......!
फिर छात्र ने आग्रह किया कि-क्या वह उनसे कुछ
सवाल पुछ सकता हैं...?
Professor ने इजाजत दी उसने पुछा-क्या ठण्ड होती
हैं..?
Professor ने कहा: हां बिल्कुल क्या तुम्हे यह महसुस नहीं होती....?
Student ने कहा:- मैं माफी चाहता हुं सर लेकिन आप गलत हो।
गर्मी का पुर्ण रुप से लुप्त होना ही ठण्ड कहलाता
हैं, जबकि इसका अस्तित्व नहीं होता। ठण्ड होती ही नहीं..?
Student ने फिर पुछा:- क्या अन्धकार होता हैं...?
Professor ने कहा:- हां,होता हैं....
Student ने कहा:- आप फिर गलत है सर।
अन्धकार जैसी कोई चीज नहीं होती वास्तव में इसका कारण रोशनी का पुर्ण रुप से लुप्त होना हैं सर हमने हमेशा गर्मी और रोशनी के बारे में पढा और सुना हैं।
ठण्ड और अन्धकार के बारे में नहीं।वैसे ही भगवान हैं....
और....
बस इसी तरह शैतान भी नहीं होता,l वास्तव में पुर्ण रुप से भगवान में विश्वास सत्य और आस्था का ना होना ही शैतान का होना हैं।
वह छात्र थे :- स्वामी विवेकानन्द..!
मित्रो जीवन में न दुख: होता हैं ना तकलीफ वास्तव में हममें जो खासियत, काबिलियत खुद में विश्वास और सकारात्मक रवैये की कमी को ही हम दुख: और तकलीफ बना देते हैं।
उसने बेहिसाब दिया हैं जो हम मानते नहीं मानस जन्म अनमोल जिसे हम पहचानते नही....

Friday, 29 May 2015

प्राचीन भारत में रेप का स्थान...

प्राचीन भारत के इतिहास में स्त्रियों के साथ छ्ल किया जाता था पर रेप नही.... किसी भी पुस्तक में रेप का विवरण नही मिलता ।। रेप का प्रचलन मुगलों के आने के बाद मिलने लगा।
इसीलिए मुग़ल के आने के बाद स्त्रियों की सुरक्षा के लिए हिंदुओं ने मुस्लिम के यहाँ प्रचलित पर्दा प्रथा अपनाया।
प्राचीन वेदों और धर्मग्रन्थो में पर्दा प्रथा का कोई विवरण नही मिलता हे। भारत में ईसा से 500 वर्ष पूर्व लिखे गए इतिहास में पर्दा प्रथा का कोई जिक्र नही था।।
अपने रामायण महाभारत आदि में माता सीता, कुंती आदि को परदे में नहीं देखा होगा , अजंता खजुराहो में कलाकृतियों में भी बिना परदे के महिला दिखती हे।
धर्मशास्त्र का इतिहास पुस्तक में पेज क्रमांक 336 में सबसे पहले पर्दा महाकाव्य में मिलता हे। वो भी केवल राज घरानों के लिए,
यहाँ तक की गाव की स्त्रियाँ भी बिना परदे के रहती थी।
धर्म
शास्त्र के इतिहास पुस्तक 337 पर पर्दा प्रथा के दो कारन थे
1-महिला की सुरक्षा
2-हिन्दू स्त्री की सुरक्षा के लिए मुस्लिम महिला के पर्दा रखने के नियम को अपनाना हिन्दू द्वारा।

आज हम दुनिया में रेप पीड़ित राष्ट्र के नाम से जाने जाते हैं.

मूर्तीपूजा का अर्थ स्वामी विवेकानंद के द्वारा


स्वामी विवेकानंद को एक मुस्लिम राजा ने अपने भवन में बुलाया और बोला,”तुम हिन्दू लोग मूर्ती की पूजा करते हो! मिट्टी, पीतल, पत्थर की मूर्ती का.! पर मैं ये सब नही मानता। ये तो केवल एक पदार्थ है।” उस राजा के सिंहासन के पीछे किसी आदमी की तस्वीर लगी थी। विवेकानंद जी कि नजर उस तस्वीर पर पड़ी। विवेकानंद जी ने राजा से पूछा,”राजा जी, ये तस्वीर किसकी है?” राजा बोला,”मेरे पिताजी की।” स्वामी जी बोले,”उस तस्वीर को अपने हाथ में लीजिये।” राजा तस्वीर को हाथ मे ले लेता है। स्वामी जी राजा से :”अब आप उस तस्वीर पर थूकिए!” राजा :”ये आप क्या बोल रहे हैं स्वामी जी? स्वामी जी :”मैंने कहा उस तस्वीर पर थूकिए..!” राजा (क्रोध से) :”स्वामी जी, आप होश मे तो हैं ना? मैं ये काम नही कर सकता।” स्वामी जी बोले,”क्यों? ये तस्वीर तो केवल एक कागज का टुकड़ा है, और जिस पर कूछ रंग लगा है। इसमे ना तो जान है, ना आवाज, ना तो ये सुन सकता है, और ना ही कूछ बोल सकता है।” और स्वामी जी बोलते गए,”इसमें ना ही हड्डी है और ना प्राण। फिर भी आप इस पर कभी थूक नही सकते। क्योंकि आप इसमे अपने पिता का स्वरूप देखते हो। और आप इस तस्वीर का अनादर करना अपने पिता का अनादर करना ही समझते हो।” थोड़े मौन के बाद स्वामी जी आगे कहाँ, “वैसे ही, हम हिंदू भी उन पत्थर, मिट्टी, या धातु की पूजा भगवान का स्वरूप मान कर करते हैं। भगवान तो कण-कण मे है, पर एक आधार मानने के लिए और मन को एकाग्र करने के लिए हम मूर्ती पूजा करते हैं।” स्वामी जी की बात सुनकर राजा ने स्वामी जी से क्षमा माँगी ।

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